अकादमिक प्रशिक्षण


भौतिकी प्रयोगशाला
     एन डी ए के स्थापना के बाद से ही अकादमिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया गया । श्री जे टी एम गिब्सन , प्रथम प्रधानाचार्य ने चुनौतीपूर्ण बाधाओं के बावजूद , अग्रणी भावना से इंटर सर्विसेज विंग में अकादमिक प्रशिक्षण की स्थापना को कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

     राष्ट्रीय युद्ध अकादमी पाठ्यक्रम और स्थापना समिति (झा समिति द्वितीय) डॉ॰ अमरनाथ झा की अध्यक्षता में हुई जिसमे १९४८ में आई एस डब्लू के लिए दो साल के कोर्स पाठ्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें २:१ के अनुपात से अकादमिक विषयों से सेना विषयों को निर्धारित किया गया। इस पाठ्यक्रम को भारतीय विश्वविद्यालयों के द्वारा इंटरमीडीएट विज्ञान के समकक्ष मान्यता दी गई। पाठ्यक्रम को समय-समय पर वर्तमान ट्रेंड और आवश्यकताओं के अनुरूप शामिल कर संशोधित किया गया। 1961 में प्रचलित पाठ्यक्रम भारतीय विश्वविद्यालयों के अनुसार था। हालांकि, अगस्त 1973 में जब एन डी ए को स्नातक डिग्री के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली से संलग्नित किया गया, तब अकादमिक माइलस्टोन को प्राप्त किया गया। 46 वें कोर्स ने 07 जून 1974 को एन डी ए से पास आउट होने वाला प्रथम स्नातक कोर्स का सम्मान हासिल किया ।


जारी कक्ष
     1987 से केडेटों को कम्प्यूटर के मूल सिद्धांतों की शिक्षा देना आरंभ किया गया। तभी, आयुध और युद्ध पर कम्प्यूटर के बढ़ते प्रभाव को देखा जा सकता था। गल्फ युद्ध की हकीकत केवल युद्ध के संबंध में अनिवार्यता, अपरिहार्यता और सूचना प्रोद्योगिकी के प्रभाव को रेखांकित करने के लिए कार्य किया । दिसम्बर 1999 में जब ’97 ‘वें कोर्स के 25 केडेटों ने बी॰एस॰सी॰ डिग्री हासिल की तब अकादमी में कम्प्यूटर शिक्षा का आरंभ हुआ । उनके अकादमिक प्रोफाइल और वर्गीकरण प्रदर्शन परीक्षा के आधार पर केडेट को विज्ञान या मानवीकी की धारा के चयन का विकल्प दिया गया।


केमिस्ट्री प्रयोगशाला
     इस बीच, पाठ्यक्रम में काफी संशोधन किए गए, 1969 में महाजनी समिति द्वारा तथा दूसरा 1986 में तीनो सेनाओं के अधिकारियों की समीक्षा की समिति द्वारा (सी ओ आर टी ओ एस) केडेटों के प्रशिक्षण को अद्यतन रखने का उद्देश्य बदलते समय के कदम से कदम मिलना है| वर्तमान पाठ्यक्रम इन तीनों समितियों का परिणाम है जिनके नाम इस प्रकार है, इंटर सर्विसेज स्टडी ग्रुप (आई एस एस जी) और एकेडमिक स्टडी ग्रुप (ए एस जी) जिसका गठन क्रमश: 27 फरवरी 2004 तथा 02 फरवरी 2005 को चीफ आफ स्टाफ द्वारा सिफ़ारिश किए गए नए अकादमिक पाठ्यक्रम की तीन कोर्स की श्रेणियों का गठन किया जो क्रमशः अनिवार्य पाठ्यक्रम, वैकल्पिक पाठ्यक्रम तथा फाउंडेशन पाठ्यक्रम है। अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल ,अंग्रेजी,विदेशी भाषा हिन्दी भाषा भौतिकी, रसायन शास्त्र,गणित,कम्प्यूटर,इतिहास,राजनीतिशास्त्र , अर्थशास्त्र और भूगोल को पूरी तरह से पुनरोत्थान (नवीनीकरण)किया गया है। साइंस तथा ह्यूमनीटीज स्ट्रीम के केडेट उनके संबन्धित अनिवार्य विषयों का अध्ययन करते हैं। वहीं दूसरी ओर पांचवे और छठें सत्र में वैकल्पिक पाठ्यक्रम को दिया जाता है जो व्यक्तिगत सेनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।


केडेट परिचालन विश्लेषक का प्रयोग करते हुए
     इसके अलावा,समिति ने नए विषयों को पुनर्गठित कर ‘सामान्य सेना विषय’ नाम दिया । हाल ही में क्रॉस स्ट्रीम के पुराने प्रणाली को खत्म कर उसकी जगह पर सैन्य अध्ययन और सामान्य अभ्यास पढ़ाये जाते हैं| अध्ययन में सैन्य इतिहास ,सैन्य भूगोल, हथियार और आयुध जैसे विषयों को पढाया जाता है। सामान्य अध्ययन में पर्यावरण विज्ञान , भू-राजनीति , मानवाधिकार , सशस्त्र संघर्ष आदि पढ़ाए जाते हैं। जहाँ तक विदेशी भाषाओं का संबंध है, समिति ने अरबी ,चीनी,फ्रेंच और रूसी की सिफ़ारिश की और कहा कि विदेशी भाषा केवल उनको पढ़ाई जाए जो केडेट हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में प्रवीणता प्राप्त कर चुके हैं ।


ज्ञानार्जन करते हुए
      शिक्षा शाखा केडेटों के अकादमिक प्रशिक्षण से संबन्धित सभी गतिविधियों के संचालन के लिए जिम्मेदार है जो कुल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 68 प्रतिशत है। प्रधानाचार्य शिक्षा शाखा के प्रमुख हैं। उनको रजिस्ट्रार द्वारा सहायता प्रदान होती है जो तीन वर्षीय स्तानक उपाधि से संबन्धित सभी पहलुओं की योजना, संचालन और निगरानी रखने के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, शिक्षा शाखा बारह विभागों में विभाजित है जिन्हें विभागाध्यक्ष तथा एसोसिएट प्रोफेसर एवं एसिस्टंट प्रोफेसर की टीम द्वारा चलाया जाता है।


कम्प्युटर प्रयोगशाला
     अकादमिक उत्कृष्टता निरंतर प्रशिक्षण के लिए आवश्यक है। एन डी ए में अकादमिक अनुदेश, शिक्षित तथा उच्च प्रोत्साहित सिविलियन तथा सेना प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया जाता है। पाठ्यक्रम को पुस्तकालयों तथा प्रयोगशालाओं द्वारा अद्यतन किया गया है। इसका उद्देश्य बाहरी गतिविधियों से समझौता किए बिना अकादमिक गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करना है।

    वर्तमान संघर्ष की बढ़ती हुई जटिलताओं को तथा उसके विविध प्रकारों को ध्यान में रखते हुए अकादमिक पाठ्यक्रम को अद्यतन किया गया है तथा रक्षा उपयोग कोर्स का संवर्धन किया गया है|

    21 वीं सदी ज्ञान की सदी हैं , एन डी ए की शिक्षा शाखा हमेशा प्रौद्योगिकी अभिविन्यास, परिवर्तनात्मक सीखने की प्रक्रिया, केडेटों के कौशल को प्रखर बनाने के लिए, उनकी पूछताछ की भावना को विकसित करने के लिए, तार्किक विचार एवं पार्श्व विचार के लिए केडेटों को बढ़ावा देती रही है| इसका उद्देश्य उनकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को गहरा बनाना एवं उनको अचूक निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाना | इसमें उनकी “सैनिक-विद्वान” के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया जाता है, जिससे आत्मविश्वास से पूर्ण उभरते लीडर केवल राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान नहीं देते, हमारे राष्ट्र का चौतरफा विकास भी करते हैं|

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