अकादमी बिल्ला और आदर्श वाक्य


अकादमी बिल्ला


प्रथम बिल्ला

वर्तमान बिल्ला
    प्रारंभिक प्रतीक चिहन में एक तलवार,क्विल पेन, एक लंगर,एक ईगल शामिल थे जो चार क्षेत्रों के प्रतीक जिसमें केडेट राष्ट्रीय युद्ध अकादमी में शिक्षा प्राप्त करते हैं।

     वर्तमान प्रतीक चिहन को 1948 में पुना लाया गया। पृष्ठभूमि में मरून रंग हैं , जो शौर्य और बलिदान का ही प्रतीक नहीं बल्कि निस्वार्थ समर्पण जैसे मूलभूत गुणों को संप्रेषित करता है। अकादमी के प्रतीक चिहन में तीनों सेनाओं के प्रतीकों को समाहित करते हुए मध्य में अशोक चिहन को सर्वोपरि स्थान दिया गया है।

अकादमी आदर्श वाक्य

     प्रतीक –चिह्न बिल्ले के ताल पर एक रिबन गढ़ी है जिसमें लंगर के नीचे तलवार है। आदर्श भगवत गीता के प्रसिद्ध वाक्य को रेखांकित करता है:-

कर्मण्येवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचन
(आपका कर्तव्य है काम करना, फल  की अपेक्षा न करना)

     यह आदर्श गांधी और लिंकन जैसे नोबेलिस्ट पुरुषों ने स्थापित किया है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह आदर्श वाक्य कुछ विशिष्ट प्रकार तक ही सीमित न रह जाएँ,जीवन के हर क्षेत्र में कर्म करना चाहिए ।इस उद्देश्य पर जोर दिया है। इस आदर्श वाक्य (‘ निष्काम कर्म ‘) (सेवा परमो धर्म:) का अनुवाद अंग्रेजी में (सर्विस बिफोर सेल्फ) किया गया हैं ।पचास के दशक में यह अंग्रेजी आदर्श वाक्य को दूर कर और भारतीय  संस्कृति  के अनुरूप संस्कृत वाक्य डालने का निर्णय किया गया। अतः इसका अनुवाद ‘’ सेवा परमो धर्म: “ किया गया|

 
 
 
 
  Army Navy Air Force
 
   
 

विक्रेता पंजीकरण प्रपत्र

 

  पहला पृष्ठ | विजन एंड मिशन | काल्पनिक यात्रा | टेंडर्स | सूचना अधिकार | आंतरिक शिकायत समिति | साइट मैप

 

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी द्वारा डिजाइन एवं विकसित किया गया। एन आई सी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) द्वारा साइट होस्ट की गई।
कॉपीराइट 2015 राष्ट्रीय रक्षा अकादमी सभी अधिकार सुरक्षित।