व्यास पुस्तकालय


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ज्ञानार्जन की खोज कभी ख़तम नहीं होती
     सन 1955 में, जब अकादमी की खड़कवासला पुणे में औपचारिक शुरुवात हुई, तब एन डी ए पुस्तकालय भूगोल लैब से आरंभ हुआ। सुदान ब्लाक के बायीं ओर स्थित व्यास पुस्तकालय का नाम प्रसिद्ध विद्वान, शिक्षक, गोल्फ खिलाड़ी और प्रशासक, जो एन डी ए के प्रधानाचार्य के पद पर पंद्रह वर्ष आसीन थे,(1953-1968) श्री॰टी॰एन॰ व्यास के नाम पर रखा गया। एन डी ए के प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त होने से पहले वे दून स्कूल में तथा बाद में मेयो कालेज, अजमेर में प्राचार्य पद पर आसीन थे। व्यास पुस्तकालय एन टी टी ईमारत के सहयोजन से एक लंगर सदृश दिखाई देता है।

     एन डी ए केडेटों को अत्यंत रुचिपूर्ण करियर में प्रवेश के लिए मिलिटरी तथा नेतृत्व प्रशिक्षण के साथ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के उपाधि के लिए पठन-पाठन का अभ्यास करने में थल सेना, नौसेना एवं वायुसेना के केडेटों को यह पुस्तकालय सहायता प्रदान करता है| केडेटों को यहाँ तीन वर्ष का पाठ्यक्रम बी. ए. , बी. एस.सी. तथा बी. एस. सी. (कम्प्युटर साइन्स) उपाधि के लिए पढ़ाया जाता है| केडेटों को पुस्तकालय के लिए अकादमिक प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में अलग समय दिया जाता है| केडेट इस समय का उपयोग , पुस्तकालय में संदर्भ पुस्तकों तथा ऑनलाइन जानकारी के लिए करते हैं|

     एन डी ए के इस पुस्तकालय में बड़ी मात्रा में पुस्तकों का संकलन है तथा ज्ञान और सूचना भंडार के रूप में उपलब्ध है। पुस्तकालय में 49 भारतीय तथा एक विदेशी पत्र/पत्रिकाओं के साथ 12 अखबार हैं| पुस्तकालय में 85000 से अधिक पुस्तकें हैं तथा 97,000 ई-पुस्तकें तथा 6000 ई-जर्नल, एन एल आई एस टी द्वारा उपलब्ध किए गए हैं (नेशनल लाइब्ररी एंड इन्फॉर्मेशन सर्विसेस फॉर स्कॉलर कंटैंट) | व्यास पुस्तकालय को तीन भागों मे विभाजित किया गया हैं | हर भाग 3000 स्क्वेयर फीट क्षेत्र में विस्तारित है| ए पी जे अब्दुल कलाम सभागार तथा फील्ड मार्शल मानेकशा सभागार पहली मंजिल पर स्थित है तथा बेसमेंट में दुर्लभ पुस्तकों का अनुभाग है| आर्यभट्ट सभागार में विश्वकोषों, वर्ष पुस्तकें, हैंडबुक तथा विविध विषयों की संदर्भ पुस्तकों सहित सर्विस डाइजैस्ट भी है| गूगल सभागार में 30 थीन क्लाईंट द्वारा केडेटों को और अन्य तीन थीन क्लाईंट द्वारा अधिकारियों को ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराई जाती है| कलाम सभागार साइन्स तथा तकनीकी साहित्य तथा प्रबंधन से सज्जित है तथा मानेकशौ सभागार में सोशल साइन्स, विश्व युद्ध 1 तथा 2, भूगोल, अर्थशास्त्र और जीवनी का संग्रहण है|

     व्यास पुस्तकालय से पुस्तकें जारी करना/पावती देना पूरी तरह से आर एफ आई डी (रेडियो फ्रिक्वेन्सी आइडेंटिफिकेशन) जीवमितीय प्रमाणीकरण पर आधारित है| इससे पुस्तकालय के सामान सत्यापन के स्वचलन के लिए भी सहायता प्राप्त होती है| ओपन पब्लिक एक्सेस कैटलॉग (ओ पी ए सी) की उपलब्धता तथा ई-पुस्तक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विज्ञान, खेल, कला से संबन्धित जानकारी एन डी ए कैन पर उपलब्ध कराई जाती है जो एन डी ए पुस्तकालय का उपयोग करनेवालों के लिए मददगार साबित होती है| व्यास पुस्तकालय के तीनों मंजिलों पर सुरक्षा केमरा लगाए गए है|

     व्यास पुस्तकालय का निर्माण पाँच दशक पहले किया गया जिसमे आधुनिकीकरण के साथ आधारभूत संरचना को बढ़ाने के कार्य के लिए अनुमानित लागत 285.72 लाख है| यह कार्य पूरा होने के बाद इसमे वर्तमान आसन व्यवस्था मे वृद्धि होने के साथ-साथ इंटरनेट टर्मिनल, डिजिटल कॉर्नर, क्लाइमेट कंट्रोल ऑफ रीडिंग रूम्, स्मोक डिटेक्टर, जेनरेटर बेस पावर बैकअप जैसी अतिरिक्त सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा तथा पुस्तकालय की आधारभूत संरचना को भी बढ़ाना आदि शामिल है| इस परियोजना के पूरा होने से यह पुस्तकालय एक ऐसा पुस्तकालय होगा जो अन्य राष्ट्रीय पुस्तकालय से अधिक सुविधाओं से पूर्ण होगा| इसने पुस्तकालय की सुविधाओं को बढ़ाया है साथ-साथ वास्तुशिल्पीय भव्यता में भी वृद्धि की है|


व्यास पुस्तकालय के सामने का दृश्य
 
 
 
 
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